श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल
कुलाध्यक्ष
राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। राष्ट्रपति बनने से पहले वे वर्ष 2004 से वर्ष 2007 तक राजस्थान के राज्यपाल के पद पर आसीन थीं।
वर्ष 1991 में वे लोकसभा के लिए चुनी गईं और लोकसभा में सदन समिति की अध्यक्ष थीं। वे वर्ष 1986 से 1988 तक राज्यसभा की उप-सभापति भी रही।
इससे पहले वे महाराष्ट्र सरकार में कई विभागों में मंत्री भी रही जिनमें निम्नांकित शामिल हैं।
- उप मंत्री, लोक स्वास्थ्य, निषेध, पर्यटन, आवासीय एवं संसदीय मामले (1967-72)
- कैबिनेट मंत्री, समाज कल्याण (1972-74)
- कैबिनेट मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण (1974-75)
- कैबिनेट मंत्री, निषेध, पुनर्वास एवं सांस्कृतिक मामले (1975-76)
श्रीमती पाटिल ने एमजे कॉलेज, जलगांव (महाराष्ट्र) से स्नातकोत्तर किया। इन्होंने मुंबई के राजकीय विधि कॉलेज से एलएलबी की। श्रीमती पाटिल ने जलगांव में एक वकील के रूप में भी सेवा दी।
श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल का जन्म 19 दिसंबर 1934 को महाराष्ट्र के जलगांव जिले में हुआ। श्रीमती पाटिल ने जलगांव में वकील और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य किया। वर्ष 1962 में महाराष्ट्र विधानसभा की सदस्य के रूप में उन्होंने अपनी सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। इसके बाद वे निरंतर निम्न दायित्वों के साथ राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय रही हैं :
- 1962-85 सदस्य, महाराष्ट्र विधानसभा
- 1967-72 उप मंत्री, लोक स्वास्थ्य, निषेध, पर्यटन, आवासीय एवं संसदीय मामले, महाराष्ट्र
- 1972-74 कैबिनेट मंत्री, समाज कल्याण, महाराष्ट्र
- 1974-75 कैबिनेट मंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण, महाराष्ट्र
- 1975-76 कैबिनेट मंत्री, निषेध, पुनर्वास एवं सांस्कृतिक मामले, महाराष्ट्र
- 1977-78 कैबिनेट मंत्री, शिक्षा, महाराष्ट्र
- जुलाई 1979 से फरवरी 1980 तक : विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, सीएलपी (आई), महाराष्ट्र
- 1982-83 कैबिनेट मंत्री, नगर विकास एवं आवास, महाराष्ट्र
- 1983-85 कैबिनेट मंत्री, नागरिक आपूर्ति एवं समाज कल्याण, महाराष्ट्र
- जून 1985-90 राज्यसभा के लिए निर्वाचित
- 18 नवंबर 1986 से 5 नवंबर 1988 तक राज्यसभा की उप सभापति
- 1986-88 चेयरमैन, विशेषाधिकार समिति, राज्यसभा सदस्य,
- व्यापार परामर्श समिति, राज्यसभा
- 1991 में 10वीं लोकसभा के लिए चुनी गईं, अध्यक्ष, सदन समिति लोकसभा
- 2004-07 राजस्थान की राज्यपाल
श्रीमती पाटिल ने कई अन्य जिम्मेदारियां भी संभाली हैं। वे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस समिति की अध्यक्ष पद पर रह चुकी हैं। इसके अलावा वे शहरी कॉपरेटिव बैंक एवं क्रेडिट सोसाइटीज के राष्ट्रीय महासंघ की अध्यक्ष, नेशनल कॉपरेटिव यूनियन ऑफ इंडिया की शासी परिषद की सदस्य, एआईसीसी (आई) की सम्मेलन सदस्य, शहरी कॉपरेटिव बैंक एवं क्रेडिट सोसाइटीज की उपाध्यक्ष और 20-सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति महाराष्ट्र की अध्यक्ष रह चुकी हैं।
सामाजिक कल्याण गतिविधियों के हिस्से के रूप में उन्होंने मुंबई और दिल्ली में कामकाजी महिलाओ के लिए छात्रावास , ग्रामीण युवाओं के फायदे के लिए जलगांव में एक इंजीनियरिंग कॉलेज की स्थापना की। उन्होंने महिला विकास महामंडल, जो सरकार का एक निगम है की स्थापना की। इसके अलावा उन्होंने जलगांव में महिला को-ऑपरेटिव बैंक स्थापित करने में मदद की। श्रीमती पाटिल ने जलगांव जिले में महिला होमगार्ड्स का गठन किया और 1962 में चीनी आक्रमण के समय उसकी कमांडेंट रहीं।
उन्होंने जलगांव में दृष्टिहीनों के लिए एक औद्योगिक प्रशिक्षण विद्यालय, अमरावती जिले में पिछड़ी जाति के बच्चों के लिए और विमुक्त जाति (घुमक्कड़ जनजाति) के बच्चों के लिए विद्यालय की स्थापना में मदद की।
किसानों को कृषि की नई तकनीकी एवं वैज्ञानिक गतिविधियां सिखाने के लिए श्रीमती पाटिल ने अमरावती में कृषि विज्ञान केंद्र और एक को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी की स्थापना करवाई। इसके अलावा जरूरतमंद और गरीब महिलाओं के लिए संगीत, कंप्यूटर और सिलाई की कक्षाओं का आयोजन किया। उन्होंने महिला विकास महामंडल की स्थापना की जो सरकार का निगम है।
श्रीमती प्रतिभा पाटिल श्रम साधना न्यास की प्रबंध न्यासी हैं जो महिलाओं के विकास के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियां संचालित करता है। वे जलगांव जिले में स्थित एक चीनी मिल की मुख्य प्रोत्साहक और अध्यक्ष हैं।
श्रीमती पाटिल का विवाह डॉक्टर देवीसिंह राम सिंह शेखावत के साथ हुआ। उनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं।