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समाचार

इग्नू की पूर्व सम कुलपति आशा कंवर सीओएल प्रमुख नियुक्त

21 फ़रवरी, 2012

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) की पूर्व सम कुलपति प्रो. आशा कंवर को कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग (सीओएल) कनाडा का अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया गया है। इस प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय का प्रभार वे 1 जून, 2012 को संभालेंगी।
 
वर्तमान में वे सीओए की उप प्रमुख हैं। वे वर्तमान सीओएल प्रमुख सर जॉन डेनियल की जगह लेंगे, जिनका कार्यकाल 31 मई, 2012 को पूरा हो जाएगा।
 
प्रो. कंवर को अध्यापन, शोध एवं प्रशासन में 30 वर्षों से भी ज्यादा का अनुभव है। उन्हें कई पुस्तकें, शोध पत्र एवं आलेख लिखने का श्रेय जाता है। उन्होंने लैंगिक अध्ययन में महती योगदान दिया है, खास एशियाई महिलाओं के जीवन पर दूर शिक्षा के असर के अध्ययन क्षेत्र में। इन अध्ययनों से यह साबित हुआ कि बेहतर शैक्षिक अवसरों एवं नई तकनीकों की उपलब्धता के कारण एशियाई महिलाओं के नजरिए, जीवन मूल्यों एवं उनके जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में काफी बदलाव हुआ है। वे इंटरनेशनल काउंसिल फॉर डिस्टेंस एजुकेशन (आईसीडीई) प्राइज ऑफ एक्सीलंेस समेत कई फेलोशिप प्राप्त कर चुकी हैं।
 
इस आशय की घोषणा करते हुए सीओए के बोर्ड ऑफ गवर्नर प्रमुख जमैका के पूर्व शिक्षा एवं संस्कृति मंत्री बर्चेल ह्नाइटमैन ने कहा, ‘‘मैं प्रो. कंवर को हमारे इस संगठन का प्रमुख नियुक्त किए के बोर्ड के फैसले का स्वागत करता हूं। मुझे उम्मीद है कि वे दूर एवं मुक्त शिक्षा के क्षेत्र में अपने गहन ज्ञान और समृद्ध अनुभव और कॉमनवेल्थ ऑफ लर्निंग के क्षेत्र में अपने विजन की बदौलत वे सीओएल को एक नये स्तर पर ले जाएंगी।’’
 
 
प्रो. कंवर 2003 मंे शिक्षा विशेषज्ञ (उच्च शिक्षा) की हैसियत से सीओएल से जुड़ी थीं और 2006 मंे वे इसकी उप प्रमुख बनी। उनकी वर्तमान जिम्मेवारी में भागीदारों के साथ संपर्क एवं कार्यक्रम निर्देशन प्रमुखता से शामिल है। वे इग्नू के मानविकी विद्यापीठ का निर्देशक और 1999 से 2000 तक इग्नू सम कुलपति रह चुकी हैं। उन्होंने सेनेगल के डाकर स्थित यूनेस्को के रिजनल आफिस फॉर एजुकेशन इन अफ्रीका (बीआरईडीए) में भी बतौर परामर्शदाता काम किया।
 
सीओएल, जो वैंकूवर (कनाडा) और नई दिल्ली स्थित संगठन है, के गठन का फैसला 1987 में राष्ट्रमंडल सरकार प्रमुखों की बैठक लिया गया था। इसका लक्ष्य विकास को बढ़ावा देना एवं मुक्त शिक्षा एवं दूर शिक्षा ज्ञान, संसाधनों एवं प्रौद्योगिकियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। 
 
प्रो. कंवर ने कहा, ‘‘सीओएल एक अनूठा संगठन है, जो यूगांडा के जंगल में रहने वाले बतवा समुदाय से लेकर मलावी की ग्रामीण महिलाओं, भारत के बकरी चरवाहों, नौरू के निर्माण मजदूरों, जमैका के स्कूल पास छात्रों, मंत्रालयों और संस्थानों सभी की जरूरतों को पूरा करने मंे सक्षम है। ऐसी दायित्व विविधता एवं अपेक्षित परिणामों के प्रति संगत बने रहना वाकई चुनौतीपूर्ण ही नहीं, बल्कि एक अवसर भी है।’’