क्षेत्रीय केंद्र

क्षेत्रीय केंद्र (56), इग्नू-थल सेना मान्यताप्राप्त क्षेत्रीय केंद्र (6), इग्नू-नौसेना मान्यताप्राप्त क्षेत्रीय केंद्र (4) और इग्नू-असम राइफल मान्यताप्राप्त क्षेत्रीय केंद्र (1) मुक्‍त विश्‍वविद्यालय प्रणाली को बढ़ावा देने; अध्ययन केंद्रों और विद्यार्थी सहायता सेवाओं के विकास, रखरखाव एवं निगरानी; और क्षेत्र में स्‍टाफ विकास कार्यक्रमों के आयोजन के लिए उत्तरदायी हैं।

क्षेत्रीय केंद्र कैसे स्थापित किए जाते हैं (कार्य-प्रणाली)

क्षेत्रीय केंद्रों को आम तौर पर संबंधित राज्य सरकारों के सहयोग और सहायता से स्थापित किया जाता है। इस संबंध में, भविष्य योजना यह है कि देश के हर राज्य में एक क्षेत्रीय केंद्र उपलब्‍ध हो।

क्षेत्रीय केंद्र के कार्य

क्षेत्रीय केंद्र को इग्नू अधिनियम की धारा 2 (जे) के तहत इस प्रकार पारिभाषित किया गया है : "क्षेत्रीय केंद्र" का अर्थ है एक ऐसा केंद्र जिसे विश्‍वविद्यालय द्वारा किसी भी क्षेत्र में अध्ययन केंद्रों के कार्य में समन्वय और पर्यवेक्षण करने तथा प्रबंधन बोर्ड (बी.ओ.एम.) द्वारा उसे सौंपे गए अन्‍य कार्य निष्‍पादित करने के प्रयोजन के लिए स्‍थापित या अनुरक्षित किया गया है। इसके अलावा, अधिनियम की धारा 5 (1) (XXII) के अधीन, किसी भी ऐसे क्षेत्रीय केंद्र को विश्वविद्यालय द्वारा स्वायत्तता देने का अधिकार भी दिया गया है, जिसे अध्ययन केंद्रों के कार्य के समन्वय और पर्यवेक्षण के लिए स्थापित किया गया है।

सुविधएँ

ऐसी सभी सुविधाएँ जो सभी व्यावहारिक प्रयोजनों के लिए विश्वविद्यालय के उप-कार्यालय अर्थात क्षेत्रीय केंद्रों को संबंधित क्षेत्रों में विश्वविद्यालय के संसाधन केंद्रों के रूप में कार्य करने के लिए आवश्‍यक है। क्षेत्रीय केंद्रों में समन्वयकों/परामर्शदाताओं/अन्य कार्मिकों को प्रशिक्षित किया जाता है। ये केंद्र विद्यार्थियों और शैक्षिक-परामर्शदाता को किसी विषय-विशेष के संदर्भ में अपनी प्रतिक्रियाएँ व्यक्त करने के लिए स्थान उपलब्‍ध कराते हैं। यदि आवश्‍यकता पड़े तो विद्यार्थी के सत्रीय कार्य की यादृच्छिक रूप से जाँच करने की जिम्मेदारी भी क्षेत्रीय केंद्रों की होती है। इसलिए, क्षेत्रीय केंद्रों पर निम्नलिखित सुविधाएँ उपलब्‍ध कराई गई हैं :