प्रस्तावना

दृष्टि 

जीवनपर्यन्तन ज्ञानार्जन

ध्येय 

समावेशिता और सतत विकास को बढ़ावा देने के लिए कौशल आधारित कार्यक्रमों के एक अनूठे संग्रह पर ध्यान केंद्रित करके व्यावसायिक सक्षमताओं का निर्माण करना।

पृष्ठभूमि

सतत शिक्षा विद्यापीठ (एसओसीई), जब अवधारणा मे आया, दो व्यापक अनुशासनात्मक क्षेत्रों में कार्यक्रमों के साथ शुरूआत हुई : ग्रामीण विकास और महिलाओं की शिक्षा। इसके विकास की प्रक्रिया में, व्यवसाय संबंधित महत्वपूर्ण क्षेत्रों की पहचान की गई और उन्हें ग्रामीण विकास, बाल विकास, दिव्यांुगता, युवा और विकास कार्य, पोषण, खाद्य सुरक्षा और आहार विज्ञान जैसे कई कार्यक्रमों के माध्यम से संबोधित किया गया। इनमें से अधिकांश क्षेत्र व्यक्तिगत अनुशासन की स्थिति के लिए उपयुक्तय हैं।

नए विद्यापीठों की स्थापना के साथ, एस.ओ.सी.ई. में शामिल कई कार्यक्रमों को संबंधित विद्यापीठों में पुनर्स्थित कर दिया गया। तदनुसार, पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर डिप्लोमा पत्रकारिता और नव-मीडिया अध्यययन में पुनर्स्थाापित कर दिया गया ; बैचलर ऑफ सोशल वर्क, मास्टर ऑफ सोशल वर्क, सी.ए.एफ., डी.ए. और डी.ए.एफ.ई. को समाज कार्य विद्यापीठ में स्थानांतरित किया गया; और महिला अध्ययन का अनुशासन स्कूल ऑफ जेंडर एंड डेवलपमेंट स्टडीज में रखा गया ।

इसके साथ ही, पोषण विज्ञान और बाल विकास अनुशासनों को विद्यापीठ में समाविष्टड किया गया।शैक्षिक परिषद की बाद की बैठक में, गृह विज्ञान के अनुशासन को पहले से ही नियत विषयों में जोड़ा गया था।

एसओसीई के पास वर्तमान में निम्नलिखित चार विषय हैं जो इसे शैक्षिक परिषद द्वारा सौंपे गए हैं :

विद्यापीठ में वर्तमान में एक पीएच.डी. कार्यक्रम दो अनुशासन क्षेत्रों में; तीन मास्टर डिग्री स्तर के कार्यक्रम; दो स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम; चार डिप्लोमा कार्यक्रम; चार प्रमाणपत्र कार्यक्रम; और तीन वैकल्पिक और अनुप्रयोग-उन्मुख पाठ्यक्रम चलाए जाते हैं ।

ग्रामीण विकास

ग्रामीण समाज के विकास संबंधी मुद्दों को समझने के लिए ग्रामीण विकास का अनुशासन अत्यंमत महत्वपूर्ण है। ग्रामीण विकास के क्षेत्र में विशेषज्ञ जनशक्ति के रूप में काम करने के लिए बड़ी संख्या में व्यमवसायियों और अधिकारियों की आवश्यकता होती है। ग्रामीण विकास में अध्ययन के कार्यक्रम ग्रामीण विकास में प्रशिक्षित जनशक्ति की आवश्यआकता के अनुरूप करते हैं। इसके दृष्टिगत निम्नलिखित कार्यक्रम की प्रस्ता्वित किए जा रहे हैं :

पोषण विज्ञान

पोषण विज्ञान का अनुशासन मानव पोषण के अध्ययन के लिए निष्ठाएपूर्वक समर्पित है और सार्वजनिक पोषण, नैदानिक और चिकित्सीय पोषण, संस्थान खाद्य सेवा प्रबंधन, खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण में सम्मिलित रूप से विशेषज्ञता प्रदान करता है। इसमें एक संभावित रोजगार क्षेत्र के रूप में उभरने की संभावना है। निम्नलिखित कार्यक्रम प्रस्तावित किए गए हैं:

बाल विकास

बाल विकास का अनुशासन सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में बाल और मानव विकास के अध्ययन के लिए समर्पित है, विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रारंभिक बचपन के वर्षों पर। इस अनुशासन में प्रदत्तल अध्ययन के कार्यक्रम जीवन-काल के परिप्रेक्ष्य में विकासात्मक चुनौतियों और जीवन-चक्र के मुद्दों की समझ प्रदान करते हैं। कार्यक्रम के विकास के लिए बाल विकास के अनुशासन पर केंद्रित क्षेत्र निम्नलिखित हैं : बचपन देखभाल और शिक्षा (ई.सी.सी.ई.); दिव्यांाग बच्चों को शामिल करना; दिव्यांखग बच्चों के माता-पिता और परिवार के सदस्यों को प्रशिक्षित करना; प्रारंभिक और मध्य बचपन, किशोरावस्था और वयस्कता; पारिवारिक और सांस्कृतिक संदर्भ में व्यक्ति के विकास को समझना और पोषण करना; और परामर्श और परिवार चिकित्सा । निम्नलिखित कार्यक्रम भी प्रस्तारवित हैं :

गृह विज्ञान

गृह विज्ञान एक ऐसा अनुशासन है जो कई प्रासंगिक जीवन कौशलों को अपनी तह में समाविष्टड करता है। मूल्यवान अंत:वैयक्तिक कौशल के विकास के अतिरिक्ते, यह विद्यापीठ छात्रों को सामुदायिक संसाधन प्रबंधन और विस्तार, और रेशमी वस्त्रों और परिधान विज्ञान जैसे संभावित रोजगार क्षेत्रों से भी परिचित कराता है। आजीवन सीखने के दृष्टिकोण और गृह विज्ञान के क्षेत्र में समकालीन विकास को ध्यान में रखते हुए, गृह विज्ञान के इन दो उप-विषयों के तहत एस.ओ.सी.ई. में श्रेष्ठ शैक्षिक कार्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं । वर्तमान में निम्नलिखित कार्यक्रम प्रस्तावित है :