प्रस्तावना

विधि विद्यापीठ (एस.ओ.एल.) 2005 में मुक्त और दूर शिक्षा पद्धति के माध्यम से कानूनी शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्या से स्थायपित किया गया था। विद्यापीठ का उद्देश्यग उभरती विश्वद व्ययवस्थाक में कानूनी अधिकारों और जिम्मेकदारियों के बारे में जागरूकता पैदा करना है। विद्यापीठ कानून के व्याववहारिक पहलुओं को सीखने, कानूनी कौशल और विद्वता प्रदान करने पर ध्यापन देने के साथ अभिनव, बहु-मीडिया शिक्षण अधिगम संपुट के माध्यकम से उच्च्व‍ गुणवत्ताय वाली शिक्षा और अनुसंधान सुनिश्चित करने का प्रयास करता है।

कानूनी शिक्षा के महत्‍व और विधि संबंधी कार्यक्रमों की माँग को स्वीवकार करते हुए, इग्नूश ने 1994 में एक प्रख्याशत कानूनी शिक्षाविद् एन.आर. माध्वी मेनन की अध्यकक्षता में पाँच सदस्यी्य समिति का गठन किया था। प्रो. मेनन की समिति ने कानून में व्यारवसायिक कार्यक्रम विकसित करने का सुक्षाव दिया, जिसमें अर्द्धकानूनी शिक्षा, न्या यालय प्रशासन, विधि और कार्यालय प्रबंधन, कानूनी सहायता प्रशासन, उद्योगों और सरकारी क्षेत्र के कर्मियों के लिए प्रेशागत और प्रबंधन उन्मुिख विधि शिक्षा के कार्यक्रम शामिल हैं। 1990 में कानून में यू.जी.सी. पाठ्यचर्या विकास केंद्र (सी.डी.सी.) की स्थायपना, एक प्रख्यांत न्याययविद् प्रो. उपेंद्र बक्सीा के नेतृत्वी में हुई थी जिसने कानूनी शिक्षा, न्यायिक नियुक्तियों और कानूनी कार्यालयों, सरकार में व्याबपक भागीदारी के लिए समावेशी कानूनी शिक्षा के रूप में कानून में दूरस्थय शिक्षा के महत्व को भी रेखांकित किया।

भारत में कानूनी शिक्षा के लिए रूपरेखा तैयार करने के लिए विधि विद्यापीठ ने जून, 2007 में एक मंथन सत्र का आयोजन किया। विचार-मंथन सत्र की महत्वेपूर्ण सिफारिशों ने विधि विद्यापीठ को विधि संबंधी कई कार्यक्रमों की योजना बनाने और विकसित करने में सक्षम बनाया।

विधि में आभासी शिक्षा (वी.ई.एल.)

यह विधि कार्यक्रमों को ऑनलाइन उपलब्ध कराने के लिए एक आभासी शिक्षण मंच है। यह 9 जून, 2008 को पेश किया गया था, जिसके माध्यिम से साइबर लॉ में पी.जी. सर्टिफिकेट ऑनलाइन प्रदान किया जा रहा है।

वी.ई.एल. की विशेषताएँ

प्रवेश के लिए चलो : अर्थात पूरे वर्ष उपलब्धस रहेगा। पंजीकरण के लिए ऑनलाइन भुगतान गेटवे की सुविधा उपलब्ध है।